બાગેવફાबागेवफाBageWafa باغِ وَفا

કરું રબનામથી આરંભ જે મોટો ક્રુપાળુ છે. નથી જેની દયાનો પાર ,જેઅનહદ દયાળુ છે.

Monday, May 15, 2006

मेरे वजूद का वाहेमा-- मुहम्मदअली भैडु”वफा”



हम कुछ भी नहीँ फीर भी हमारे होने का है वाहेमा,
वक़्त के सांचेमे एक दिन पीस जायेगी सब दास्ताँ.

तु कया तेरी नक़्सी हक़ीक़त का तिलस्म तूट्जायेगा,
राजदार थाभी ये आयेना ,चुपभी रहेगा ये आयेना.

मुहम्मदअली भैडु”वफा”

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